➤ प्रदेश के सभी सरकारी स्कूलों में सुबह की प्रार्थना सभा के दौरान 15 मिनट पीटी अनिवार्य
➤ PET/DPET उपलब्ध होने पर वही कराएंगे व्यायाम, अन्य स्कूलों में अन्य शिक्षक निभाएंगे जिम्मेदारी
➤ फिटनेस, अनुशासन, मानसिक एकाग्रता और खेल संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए शिक्षा विभाग का बड़ा फैसला
शिमला। हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की शारीरिक फिटनेस, अनुशासन और मानसिक एकाग्रता को बढ़ावा देने के लिए प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय ने बड़ा निर्णय लिया है। विभाग ने प्रदेश के सभी सरकारी स्कूलों में सुबह की प्रार्थना सभा के दौरान प्रतिदिन कम से कम 15 मिनट का शारीरिक व्यायाम (पीटी) अनिवार्य कर दिया है। इस संबंध में सभी जिला उपनिदेशकों और स्कूल प्रमुखों को निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
शिक्षा विभाग के अनुसार अब स्कूलों की सुबह की प्रार्थना सभा केवल औपचारिक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसे विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास से जोड़ा जाएगा। निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि प्रतिदिन प्रार्थना सभा के दौरान कम से कम 15 मिनट का समय स्ट्रेचिंग, पीटी, हल्के व्यायाम और शारीरिक गतिविधियों के लिए निर्धारित किया जाएगा, ताकि विद्यार्थियों में स्वस्थ जीवनशैली की आदत विकसित हो सके।
विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिन स्कूलों में PET (Physical Education Teacher) या DPET तैनात हैं, वहां वही विद्यार्थियों को पीटी और व्यायाम कराएंगे। वहीं जिन स्कूलों में शारीरिक शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं, वहां अन्य शिक्षक इस जिम्मेदारी का निर्वहन करेंगे। इसके साथ ही स्कूल क्लस्टर स्तर पर भी विद्यार्थियों की खेल गतिविधियों में भागीदारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
निदेशालय द्वारा जारी पत्र में कहा गया है कि प्रार्थना सभा में राष्ट्रगान के साथ-साथ नैतिक मूल्यों और सकारात्मक सोच को बढ़ावा देने वाली प्रार्थनाएं भी शामिल की जाएंगी। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, अनुशासन, सामूहिक भावना और सकारात्मक व्यक्तित्व का विकास करना है।
इसके अलावा सभी सरकारी स्कूलों को प्रतिदिन एक खेल पीरियड सुनिश्चित करने और विद्यार्थियों को प्राथमिक उपचार (First Aid) संबंधी बुनियादी प्रशिक्षण देने के भी निर्देश दिए गए हैं। शिक्षा विभाग का मानना है कि नियमित शारीरिक गतिविधियों से विद्यार्थियों का शारीरिक स्वास्थ्य बेहतर होगा, मानसिक तनाव कम होगा और पढ़ाई में एकाग्रता भी बढ़ेगी।
शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि बदलती जीवनशैली और बढ़ते स्क्रीन टाइम के बीच विद्यार्थियों को नियमित व्यायाम की आदत डालना समय की आवश्यकता है। ऐसे में विभाग का यह फैसला सरकारी स्कूलों में स्वास्थ्य और खेल संस्कृति को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।



